गुप्त नवरात्रि साल में चार बार आती है और यह खास तौर पर तंत्र-मंत्र, मंत्र सिद्धि और गुप्त साधनाओं के लिए जानी जाती है, जिसमें दस महाविद्याओं (जैसे महाकाली, तारा, भुवनेश्वरी, बगलामुखी) की पूजा होती है, जो आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक मानी जाती है, और इसके नियमों में तामसिक भोजन से परहेज और ब्रह्मचर्य का पालन प्रमुख है, जिसमें सामान्य नवरात्रि से भिन्न, उग्र स्वरूपों की तस्वीरें नहीं लगाई जातीं और ज्वार बोने की परंपरा नहीं होती है.
कब होती है?
गुप्त नवरात्रि हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन के महीनों में आती है, जिसमें से दो 'प्रकट' और दो 'गुप्त' होती हैं.
महत्व और पूजा विधि
करें: सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य का पालन, घर में शांति, मां के सौम्य स्वरूपों की पूजा.
पौष गुप्ती नवरात्रि
पौष गुप्ती नवरात्रि को दिसंबर के महीने में मनाया जाता है। शुक्ल पक्ष
में इन नवरात्रों को मनाया जाता है। इन नवरात्रों में मां शाकंबरी देवी की पूजा की
जाती है, इसलिए इन्हें शाकंबरी नवरात्रि के
नाम से भी जाना जाता है। इन्हेंक ज्या दातर उत्त र-प्रदेश, महाराष्ट्रर, राजस्था
न, तमिलनाडु और कर्नाटक में मनाया जाता
है।