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शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri)

 

शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो हर साल आश्विन मास (शरद ऋतु) के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नौ दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा-अर्चना की जाती है, यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत (दशहरा) के साथ समाप्त होता है और आध्यात्मिक शुद्धि व शक्ति का प्रतीक है. 

मुख्य बातें:

  • समय: आश्विन (शरद) मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक.
  • देवता: मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों (जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) की पूजा.
  • महत्व: यह ऋतु परिवर्तन के समय मनाया जाता है, जिससे प्रकृति में आने वाले बदलावों से बचाव और आंतरिक शुद्धि के लिए उपवास व पूजा का विधान है.
  • प्रतीक: यह मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है.
  • समापन: इसका समापन विजयादशमी (दशहरा) के रूप में होता है. 
क्यों मनाते हैं?
प्राचीन काल से, इस दौरान देवी की साधना की जाती है ताकि भक्त आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त कर सकें और जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकें. यह पर्व आत्म-संयम, भक्ति और सामूहिक सौहार्द का भी प्रतीक है

महत्वपूर्ण जानकारी और अनुष्ठान

  • घटस्थापना (कलश स्थापना): नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाता है। 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 06:19 से 10:12 तक रहेगा।
  • देवी के 9 रूप: इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
  • महत्व: यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मान्यता है कि देवी दुर्गा ने नौ रातों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन (दशहरा) उसका वध किया था।
  • पारण: नौ दिनों के उपवास के बाद व्रत खोलने की प्रक्रिया को 'पारण' कहा जाता है। 2026 में नवरात्रि का पारण 20 अक्टूबर को होगा। 

नवरात्रि के दौरान भक्त उपवास रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े उत्साह के साथ गरबा और डांडिया नृत्य का आयोजन किया जाता है।