कृष्ण
पक्ष हिन्दू
पंचांग के अनुसार पूर्णिमा
के बाद शुरू होकर अमावस्या तक का 15 दिनों का वह चरण है, जिसमें चंद्रमा घटता जाता है और उसका प्रकाश कम
होता जाता है; इसे वदी या वद्य पक्ष भी कहते हैं, जो अंधेरे और पितरों के पूजन का समय माना जाता है
और इस दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं, जबकि शुक्ल पक्ष इसके विपरीत, अमावस्या से पूर्णिमा तक होता है, जिसमें चंद्रमा बढ़ता है.
कृष्ण पक्ष की मुख्य बातें:
- अवधि: पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू
होकर अमावस्या तक (15 दिन).
- अर्थ: 'कृष्ण' का अर्थ 'अंधेरा' या 'काला' है, और 'पक्ष' का अर्थ 'भाग' है, जो घटते चंद्रमा को दर्शाता है.
- धार्मिक महत्व:
- यह
पितरों (पूर्वजों) को समर्पित होता है; इस पक्ष में श्राद्ध और तर्पण किया जाता
है.
- इसे
आत्म-चिंतन, साधना और ध्यान का समय माना जाता है.
- मान्यता
है कि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है, इसलिए
शुभ या नए कार्य (जैसे विवाह, गृह-प्रवेश) वर्जित होते हैं.
- पौराणिक कथा: दक्ष प्रजापति के श्राप के कारण
चंद्रमा का तेज घटने लगा, जिससे
कृष्ण पक्ष की शुरुआत हुई, जिसे
शिवजी के आशीर्वाद से आंशिक रूप से ठीक किया गया, जिससे शुक्ल-कृष्ण पक्ष का चक्र
बना.