प्राकृतिक रत्न: ये लाखों वर्षों में पृथ्वी के भीतर बनते हैं,
और
इनकी रासायनिक संरचना तथा क्रिस्टल संरचना अद्वितीय होती है।
सिमुलेंट्स (Simulants ) : ये प्राकृतिक रत्नों की दिखावट की नकल करते हैं, लेकिन रासायनिक और भौतिक रूप से उनसे भिन्न होते हैं—उदाहरण के लिए, क्यूबिक ज़िरकोनिया जो हीरे जैसा दिखता है।
रत्न अपनी खनिज प्रजातियों के आधार पर भी वर्गीकृत किए जाते हैं, जो उनकी रासायनिक संरचना और क्रिस्टल संरचना को निर्धारित करती है। इसके उदाहरणों में शामिल हैं:
क्वार्ट्ज़
परिवार: एमेथिस्ट, सिट्रीन, रोज़ क्वार्ट्ज़ और एगेट।
फेल्डस्पार समूह: मूनस्टोन, लैब्राडोराइट, अमेज़ोनाइट।
कोरंडम: रूबी और नीलम।
गार्नेट
प्रजाति: अल्मांडाइन, एंड्राडाइट, स्पेसारटाइन।
· बेरिल परिवार: पन्ना, एक्वामरीन, मोरगानाइट।
विशेषताएँ
कुछ रत्न अनोखे ऑप्टिकल प्रभाव दिखाते हैं:
• चैटॉयेंसी
("बिल्ली की आँख"): एक्टिनोलाइट और क्राइसोबेरिल में देखी जाती है।
• एस्टरिज्म
("तारा प्रभाव"): स्टार नीलम और माणिक में पाया जाता है।
• रंग
परिवर्तन: एलेक्जेंड्राइट अलग-अलग रोशनी में अपना रंग बदल लेता है।
मुख्य गुण
रत्नों का मूल्यांकन इन आधारों पर किया जाता है:
• कठोरता
(मोह्स पैमाना, जैसे, हीरा
• अपवर्तनांक
(चमक को प्रभावित करता है)
• विशिष्ट
गुरुत्व
• स्पष्टता
और पारदर्शिता