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तिथि

 

पंचांग में तिथि हिन्दू कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो चंद्रमा और सूर्य की स्थिति पर आधारित होती है और एक चंद्र मास (लगभग 29.5 दिन) को 30 भागों में बांटती है, जहाँ हर तिथि (चंद्र दिवस) सूर्य और चंद्रमा के बीच 12 डिग्री के अंतर से बदलती है, जिसमें प्रतिपदा से अमावस्या/पूर्णिमा तक 15-15 तिथियाँ होती हैं और शुक्ल व कृष्ण पक्ष में बंटी होती हैं, जो व्रत और शुभ-अशुभ मुहूर्त के लिए महत्वपूर्ण हैं।

तिथि क्या होती है?

  • समय की माप: यह वैदिक समय मापने की एक इकाई है, जो चंद्रमा के आधार पर तय होती है।
  • सूर्य और चंद्रमा का कोण: जब चंद्रमा और सूर्य के बीच देशांतरीय कोण 12 डिग्री का अंतर पूरा करता है, तब एक तिथि बदलती है।
  • अवधि: एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं, और हर तिथि एक दिन से थोड़ी कम या ज़्यादा हो सकती है।

 तिथियों के नाम (1 से 14 तक, फिर पक्ष का अंत):

शुक्ल पक्ष (बढ़ते चंद्रमा): प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी (पंचमी), षष्ठी (छठ), सप्तमी (सातम), अष्टमी (आठम), नवमी (नौमी), दशमी (दसम), एकादशी (ग्यारस), द्वादशी (बारस), त्रयोदशी (तेरस), चतुर्दशी (चौदस) और फिर पूर्णिमा


कृष्ण पक्ष (घटते चंद्रमा): प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज)... चतुर्दशी (चौदस) और फिर अमावस्या

सभी तिथियों की अपनी एक आध्यात्मिक विशेषता होती है जैसे -

  • अमावस्या 'पितृ पूजा' के लिए आदर्श होती है।
  • चतुर्थी गणपति की पूजा के लिए आदर्श होती है।
  • पंचमी आदिशक्ति की पूजा के लिए आदर्श होती है।
  • षष्टी 'कार्तिकेय पूजा' के लिए आदर्श होती है।
  • नवमी 'राम' की पूजा आदर्श होती है।
  • एकादशी व द्वादशी विष्णु की पूजा के लिए आदर्श होती है।
  • त्रयोदशी शिव पूजा के लिए आदर्श होती है।
  • चतुर्दशी शिव  गणेश पूजा के लिए आदर्श होती है।
  • पूर्णिमा सभी तरह की पूजा से सम्बन्धित कार्यकलापों के लिए अच्छी होती है।