अमावस्या (Amavasya) हिन्दू चंद्र कैलेंडर के अनुसार वह दिन होता है जब चंद्रमा पूरी तरह से अदृश्य होता है,
क्योंकि यह सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है;
यह कृष्ण
पक्ष की अंतिम तिथि है और इसे पितरों का
दिन माना जाता है, जिस पर तर्पण, दान-पुण्य, स्नान और पूजा करने से पितृ
दोष से मुक्ति और सुख-समृद्धि मिलती है, जबकि इस दिन शुभ कार्य वर्जित होते
महत्व और मान्यताएँ:
- पितृ पक्ष: यह पूर्वजों (पितरों) को याद करने और उनके
लिए पिंडदान, तर्पण और
दान करने का दिन है, जिससे
उन्हें शांति मिलती है।
- शुभ-अशुभ: इस दिन शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं,
लेकिन दान, स्नान और पूजा-पाठ (विशेषकर हनुमान, शिव और लक्ष्मी जी की) का विशेष महत्व है।
- विभिन्न प्रकार: सोमवार को सोमवती, मंगलवार को भौमवती और शनिवार को शनिश्चरी
अमावस्या कहते हैं, जिनके
अलग-अलग लाभ होते हैं (जैसे शनिश्चरी पर पीपल पूजा)।
- उपाय: मछलियों को आटा खिलाना, पवित्र नदी में स्नान करना, अन्न दान करना और घर के मुख्य द्वार पर दीपक
जलाना जैसे उपाय किए जाते हैं।